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यद्यपि 21वीं शताब्दी का तृतीय दशक महिला सशक्तीकरण की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण रहा है, किन्तु जहाँ शहरी क्षेत्र के छात्राओं की अपनी कलात्मक प्रतिभा, बौद्धिक क्षमता को निखारने, अपने व्यक्तित्व को सवारने का पूर्ण अवसर मिल रहा है, वहीं ग्रामीण अंचल (विशेष रूप से इस क्षेत्र) की छात्राओं की प्रतिभाएँ उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, वाणिज्यिक शिक्षा के अभाव में दम तोड़ती नजर आ रही है। पारिवारिक बाध्यताओं, सामाजिक वर्जनाओं के अतिरिक्त उच्च शिक्षण संस्थाओं का अभाव इस क्षेत्र के छात्र/छात्राओं के विकास में सबसे बड़े. अवरोधक के रूप में खड़ा है।
उच्च शिक्षा राष्ट्र का आधार स्तम्भ होती है। युवा राष्ट्र का सर्वस्व होता है, उसके ही मजबुत कंधो पर राष्ट्र का भविष्य निर्भर करता है। शिक्षा का स्तर जितना ऊँचा होगा, राष्ट्र उतना ही स्वावलम्बी होगा, इसलिए ज्ञानार्जन राष्ट्र की बहुमूल्य सम्पत्ति है। संस्कृत सूक्ति के अनुसार -
'नहि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिहमश्नुते।'
अर्थात, "ज्ञान के समान पवित्र अन्य कोई चीज नहीं है।"
ज्ञान केन्द्र शैक्षणिक संस्थायें होती है। शैक्षणिक संस्थाओं का संचालन भी एक राष्ट्रीय दायित्व है। इस संस्थान का छात्र। छात्राओं की प्रतिभा को निखार कर देश के नव निर्माण एवं राष्ट्रहित में तैयार करना ही भूल उद्देश्य है। यह संस्थान चरित्र निर्माण के साथ-साथ उच्च स्तरीय ज्ञान प्रदान करने के लिए कृत संकल्पित है।
यह संस्थान भीड़-भाड़ एवं कोलाहल से दूर एकान्त एवं शान्त स्थान पर स्थित है। मै क्षेत्रिय जनता और अभिभावकों से अनुरोध करता हूँ कि वे अपने बच्चो को महाविद्यालय में प्रवेश दिलाकर उच्चशिक्षा के प्रचार-प्रसार में सहभागी बनें। संस्थान के प्रबन्धतन्त्र तथा सुयोग्य प्राध्यापकों के सतत. प्रयास से संस्थान दिन-प्रतिदिन विकास के पथ पर अग्रसर हो। मेरी शुभकामना है कि यह संस्थान अपना कीर्तिमान स्थापित करने में सफल हो। मै समस्त शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर सहकर्मियों तथा छात्र। छात्राभों को अनेक लक्ष्य प्राप्ति के लिए मंगल कामना करता है।
शुभकामनाओं सहित-
आपका
श्री मधुसूदन सिंह
(प्रबन्धन)