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येषां न विद्या न तपो न दानं,
ज्ञान न शीलो न गुणों ने धर्म:।
ते मत्यलोके, भूवि भारभूताः,
मनुष्यरूपेण भृगश्चरन्ति ।।
सत्य ही है। विद्या तप, दान, शील, गुण व धर्म के बिना मनुष्य पृथ्वी पर भार तो है ही, साथ-साथ वह पशु के समान भी है। विद्यालय जहाँ विद्या प्राप्ति का केंद्र होता है वही छात्र/छात्राओं के सर्वांगिण व्यक्तित्व के विकास में सहायक भी होता है
जमीन से जुड़े होने के कारण ग्रामीणों में सृजन की ऊर्जा होती है- लेकिन जाति, धर्म एवं समाज के बन्धनों में जकड़े हुए ग्रामीण अंचल के नागरिको एवं सर्वहारा वर्ग के निर्धन छात्रों के ज्ञानाभाव को दूर करने तथा नवचेतना का संचार करने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगो को अपनी साँस्कृतिक विरासत के मूल रूप से परिचित कराने के लिए उच्च शिक्षा प्रदान करने की दिशा में किया गया एक उपयोगी प्रयत्न है आर.बी.सिंह महाविद्यालय'।
आज के भूमण्डलीकरण के परिवेश में अपनी पृथक पहचान एवं अस्तित्व को बनाये रखने के लिए हमें ज्ञान की महत्ता को समझना होगा। इसी आवश्कता-को ध्यान में रखते हुए "आर०बी० सिंह महाविद्यालय' के प्रबन्धक उदारमना, समाजसेवक आदरणीय श्री भधुसूदन सिंह के मन में आर०बी० सिंह महाविद्यालय की स्थापना का विचार जागृत हुका जिसे अथक परिडाग द्वारा साकार रुप दिया गया। यह शिक्षण संस्थान सोनभद्र जनपद के प्राचीन विख्यात अन्नमण्डी घोरावल से 3 kmकैमूर पर्वत की वादियों में दीवा गांव में स्थित है। इस संस्थान में स्नातक स्तर पर कला वर्ग में - हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, समाजशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, प्राचीन इतिहास, राजनीति विज्ञान, गृह विज्ञान, भूगोल, अर्थशास्त्र, एवं कला विषय तथा विज्ञान वर्ग मे गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जन्तु विज्ञान और वनस्पति विज्ञान विषयो के अध्ययन एवं अध्यापन की शुरुआत हो चुकी है। इस संस्थान का उद्देश्य ग्रामीणांचल के दलित पिछड़े वर्ग एवं आर्थिक दृष्टि से विपन्न छात्र/छात्राओं की प्रतिभा एवं व्यक्तित्व से सम्बद्ध शारीरिक, मानसिक, नैतिक, एवं चारित्रिक विकास को, प्रोत्साहित करना है। क्षेत्र के अभिभावको से मेरा अनुरोध है कि अपने पाल्यों का प्रवेश दिलाकर उनके सर्वांगिण विकास के लिए हमारा सहयोग करने की कृपा करें।
अंत में मैं सगय-समय पर मिलने वाले अपेक्षित सहयोग एवं मार्गदर्शन हेतु आर.बी.सिंह महाविद्यालय के आदरणीय प्रबन्धक जी के प्रति हृदय से आभा व्यक्त करता है।
शुभकामनाओं सहित-
आपका
डा. सुनील कुमार चहुर्वेदी
(प्राचार्य)